अक्सर महसूस करती हूँ मैं,
तुम्हारी खुशबू
अपने आस-पास ,
महक उठता है तन,
पुलकित हो जाता हैं मन,
उस परिचित सी सुगंध से ,
सिहर सी जाती हूँ मैं,
जब याद आता है किसी का पहला स्पर्श ,
गर्मी का खुश्क महीना भी
जैसे बन जाता है ,
बारिश का सा मौसम ,
लगता है जैसे
चुरा लिया हो,
किसी ने मुझको मुझसे ही,
साधिकार किया हो प्यार,
दे दिया हो जीवन भर को
स्मृतियों का उपहार।
तुम्हारी खुशबू
अपने आस-पास ,
महक उठता है तन,
पुलकित हो जाता हैं मन,
उस परिचित सी सुगंध से ,
सिहर सी जाती हूँ मैं,
जब याद आता है किसी का पहला स्पर्श ,
गर्मी का खुश्क महीना भी
जैसे बन जाता है ,
बारिश का सा मौसम ,
लगता है जैसे
चुरा लिया हो,
किसी ने मुझको मुझसे ही,
साधिकार किया हो प्यार,
दे दिया हो जीवन भर को
स्मृतियों का उपहार।

