बुधवार, 13 जून 2012




















वक़्त गुज़रता जा रहा है,
 यादें धुंधली होती जा रही हैं,
 दूरियां बढती  जा रही हैं,
 मुमकिन है यादो की  भीड़  में,
तुम भूल जाओ मेरा चेहरा भी,
में बन कर रह जाऊं ,एक धुंधली तस्वीर ,
मेरी आवाज तक तुम्हे याद  न रहे,
लेकिन वक़्त कितना भी गुज़र जाये,
कितनी भी दूरियाँ  आ जाये,
में नहीं भुला पाऊंगी तुम्हे,
तुम्हारे साथ बीता हर एक पल
 मुझे  ऐसे याद  है जैसे कल ही की बात हो,
तुम्हारी कही हुई  हर एक बात,
 मुझे आज भी याद  है ,
और आगे भी रहेगी
तुम्हे याद  रहे न रहे।








1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ... सुंदर भाव अभिव्यक्ति...

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