सोमवार, 20 अगस्त 2012







कभी-कभी बच्चो सी जिद ,
करने लगती हूँ मैं,
पाना चाहती हूँ वो सब,
जो खो गया है वक़्त की दौड़ में,
जानते हुए भी कि अब मुश्किलहै,
उसका वापस आना ,
फिर भी चाहती हूँ मैं ,
वापस पाना वो,
 जो मिला था हमें,
 पहले प्यार की सौगात में,
वो तुमसे मिलने के इन्तजार में,
घड़ियाँ गिनना,
वो तुमसे करने को बातें इकट्ठी करना,
वो मिलने  की हड़बड़ाहट,
वो बैचेनी वो घबराहट,
वो गला खुश्क होना ,
होठों का सूख जाना ,
वो तुमसे नज़रें चुराना ,
वो दिल की धडकनों का बढ जाना,
वो तुम्हे सुनते रहने की चाहत,
वो तुम्हारी मुस्कुराने की आदत ,
वो हमारी खिलखिलाहट भरी हंसी,
वो तुम्हारी  आँखों की कशिश ,
वो तुम्हारे बारे में सोच कर मुस्कुराना ,
वो तुम्हारा ख्वाबों में आना,
वो  रूठना- मनाना,
हँसना- रुलाना,
और धीरे -धीरे
 मेरी जिन्दगी बन जाना,
आज तुमसे जुदा होने के बाद,
पाना चाहती हूँ एक बार फिर से वो सब,
और लेना चाहती हूँ ,
अपने जीवन की अंतिम साँस,
  उसी कल में।

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